गीत
चुप न रहें
निज स्वर में गायें;
निविड़ तिमिर में
दीप जलाएं...
फिक्र नहीं जो
जग ने टोका
बाधा दी
हर पग पर रोका
झेल प्रबल
तूफां का झोंका
मुश्किल में
सब मिल मुस्काएं...
कौन किसी का
सदा सगा है?
अपनेपन ने
छला-ठगा है
झूठा नाता
नेह पगा है
सत्य न यह
पल भर बिसराएँ...
कलकल निर्झेर
बन बहना है
सुख-दुःख सम
चुप रह सहना है
नहीं किसी से
कुछ कहना है
रुकें न
मंजिल पायें...
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