सोमवार, 12 अक्तूबर 2009

दोहा गीत: मातृ ज्योति- दीपक पिता,

दोहा गीत

विजय विषमता तिमिर पर,
कर दे- साम्य हुलास..
मातृ ज्योति- दीपक पिता,
शाश्वत चाह उजास....

*

जिसने कालिख-तम पिया,
वह काली माँ धन्य.
नव प्रकाश लाईं प्रखर,
दुर्गा देवी अनन्य.
भर अभाव को भाव से,
लक्ष्मी हुईं प्रणम्य.
ताल-नाद, स्वर-सुर सधे,
शारद कृपा सुरम्य.
वाक् भारती माँ, भरें
जीवन में उल्लास.
मातृ ज्योति- दीपक पिता,
शाश्वत चाह उजास...

*

सुख-समृद्धि की कामना,
सबका है अधिकार.
अंतर से अंतर मिटा,
ख़त्म करो तकरार.
जीवन-जगत न हो महज-
क्रय-विक्रय व्यापार.
सत-शिव-सुन्दर को करें
सब मिलकर स्वीकार.
विषम घटे, सम बढ़ सके,
हो प्रयास- सायास.
मातृ ज्योति- दीपक पिता,
शाश्वत चाह उजास....

**************
= दिव्यनर्मदा.ब्लागस्पाट.कॉम

1 टिप्पणी:

  1. shanno ने कहा…

    अति सुंदर भाव - व्यक्ति:

    विषम घटे, सम बढ़ सके,
    हो प्रयास - सायास.
    मातृ ज्योति- दीपक पिता,
    शाश्वत चाह उजास....

    Saturday, October 17, 2009 2:47:00 AM


    अविनाश वाचस्पति ने कहा…

    अविनाश वाचस्पति October 16, 2009 11:04 PM

    उजास का पर्याय पिता

    सायास की राह पिता

    Saturday, October 17, 2009 8:13:00 AM


    संगीता पुरी ने कहा…

    सुंदर रचना !!

    पल पल सुनहरे फूल खिले , कभी न हो कांटों का सामना !
    जिंदगी आपकी खुशियों से भरी रहे , दीपावली पर हमारी यही शुभकामना !!

    Saturday, October 17, 2009 8:14:00 AM


    योगेश स्वप्न ने कहा…

    sunder abhivyakti................shubh deepawali ki mangalkaamnayen sweekaren.

    October 17, 2009 6:10 AM

    Saturday, October 17, 2009 8:15:00 AM

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