सोमवार, 23 फ़रवरी 2009

गीत चलो हम सूरज उगायें

गीत
चलो हम सूरज उगायें
चलो!
हम सूरज उगाएं
सघन तम से क्यों डरें हम?
भीत होकर क्यों मरें हम?
मरुस्थल भी जी उठेंगे-
हरीतिमा मिल हम उगायें...
विमल जल की सुनें कल-कल।
भुला दें स्वार्थों की किल-किल।
सभी सब के काम आयें...
लाये क्या?, ले जायेंगे क्या?,
किसी के मन भाएंगे क्या?
सोच यह जीवन जियें हम।
हाथ-हाथों से मिलाएं...
आत्म में विश्वातं देखें।
हर जगह परमात्म लेखें।
छिपा है कंकर में शंकर।
देख हम मस्तक नवायें...
तिमिर में दीपक बनेंगे।
शून्य में भी सुनेंगे।
नाद अनहद गूंजता जो
सुन 'सलिल' सबको सुनायें...

9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर रहा....महा शिव रात्रि की बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं..

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  2. बहुत सुन्दर रचना है।बधाई स्वीकारें।

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह !! वाह !! वाह !!
    प्रशंशा को शब्द नही मेरे पास.......
    भावपूर्ण सरस अतिसुन्दर कविता......

    उत्तर देंहटाएं
  4. ब्लोगिंग जगत मे स्वागत है
    सुंदर रचना के लिए शुभ्कामनाए
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    www.chitrasansar.blogspot.com

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  5. ब्लोगिंग जगत मे स्वागत है
    सुंदर रचना के लिए शुभ्कामनाए
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
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  6. बहुत अच्छी रचना, सुन्दर
    उमंग से भरपूर, विशवास भरती जीवन में

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत ही सुंदर रचना, ब्लॉग जगत में आपका स्वागत

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