सोमवार, 24 मई 2010

गीत: मिला न उनको पानी.... --संजीव 'सलिल'


गीत:
मिला न उनको पानी....
संजीव 'सलिल'
*


















*
छलनेवाले, छले गए
कह-सुन नित नयी कहानी.
आग लगाते रहे, जले
जब- मिला न उनको पानी....
*
नफरत के खत लिखे अनगिनत
प्रेम संदेश न भेजा.
कली-कुसुम को कुचला लेकिन
काँटा-शूल सहेजा.

याद दिलाई औरों को, अब
याद आ रही नानी....
*
हरियाली के दर पर होती
रेगिस्तानी दस्तक.
खाक उठायें सिर वे जिनका 
सत्ता-प्रति नत मस्तक.

जान हथेली पर ले, भू को
पहना चूनर धानी....
*
अपनी फ़िक्र छोड़कर जो
करते हैं चिंता सबकी.
पाते कृपा वही ईश्वर, गुरु,
गोड़, नियति या रब की.

नहीं आँख में, तो काफी
मरने चुल्लू भर पानी....
*****
http://divyanarmada.blogspot.com

3 टिप्‍पणियां:

  1. नहीं आँख में, तो काफी
    मरने चुल्लू भर पानी
    प्रवाह और भावयुक्त रचना सुन्दर प्रभाव

    उत्तर देंहटाएं

छोटी सी ये दुनिया...

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