गीत सलिला आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

शब्द ब्रम्ह आराधना, है जीवन का ध्येय ज्ञेय हो रहा शब्द से, वह जो है अज्ञेय अज़र अमर अक्षर अटल, सलिल शब्द के रूप बिम्ब भाव रस की समझ, दे आनंद अनूप सलिल शब्द की साधना, है प्रभु का वरदान करते तरते हैं वही, जो हैं चतुर सुजान

रविवार, 1 जनवरी 2023

संजीव १ जनवरी

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  गीत उजास दे * नवल वर्ष के प्रथम सूर्य की प्रथम रश्मि पल पल उजास दे। • गूँजे गौरैया का कलरव सलिल-धार की घटे न कलकल पवन सुनाए सन सन सन सन हो...
सोमवार, 6 दिसंबर 2021

छंद झूलना, झूलना छंद, नवगीत, मुक्तक, दोहा, लघुकथा, गीत

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छंद झूलना (विधान : ६ x ५ + २ + ५, ३७ मात्रिक, पदांत * नर्मदा वर्मदा शर्मदा धर्मदा मातु दो नीर हर लो पिपासा। प्राण-मन तृप्त हो, भू न अभिशप्त...

सॉनेट

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सॉनेट  वंदना * वंदन देव गजानन शत-शत। करूँ प्रणाम शारदा माता। कर्मविधाता चित्र गुप्त प्रभु।। नमन जगत्जननी-जगत्राता।। अंतरिक्ष नवगृह हिंदी माँ...
बुधवार, 17 जनवरी 2018

दोहा दुनिया

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सोमवार, 15 जनवरी 2018

दोहा दुनिया

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शिव को पा सकते नहीं, शिव से सकें न भाग। शिव अंतर्मन में बसे, मिलें अगर अनुराग।। * शिव को भज निष्काम हो, शिव बिन चले न काम। शिव-अनुकंप...
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सोमवार, 17 अगस्त 2015

muktak geet

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मुक्तक गीत  संजीव * पीटो ढोल  बजाओ मँजीरा  * भाग गया परदेशी शासन गूँज रहे निज देशी भाषण  वीर शहीद  स्वर्ग से हेरें  मँहग...
2 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 5 मई 2015

navgeet: jaisa boya -sanjiv

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नवगीत: जैसा बोया  संजीव * जैसा बोया वैसा पाया . तुमने मेरा मन तोड़ा था सोता हुआ मुझे छोड़ा था जगी चेतना अगर तुम्हारी मुझे नहीं ...
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navgeet: dhaee aakahr -sanjiv,

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नवगीत: ढाई आखर संजीव  * जिन्स बना  बिक रहा आजकल  ढाई आखर।।  . दाँत दूध के टूट न पाये पर वयस्क हैं।   नहीं सुंदरी नर्स इसलिए अनमयस्क हैं।  ...

muktika (hindi gazal): baat kar -sanjiv

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मुक्तिका (हिंदी ग़ज़ल)   बात कर संजीव  * Photo by  kevin dooley   निर्जीव को संजीव बनाने की बात कर हारे हुओं को जंग जिताने की ब...

muktika (hindi gazal) - sanjiv,

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मुक्तिका (हिंदी ग़ज़ल) : चूक जाओ न संजीव  * Photo by  Vincepal   चूक जाओ न, जीत जाने से कुछ न पाओगे दिल दुखाने से काश! ख़ामोश ...

muktika (hindi gazal) - sanjiv

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मुक्तिका: बोलना था जब संजीव    Photo by  Real Cowboys Drive Cadillacs   बोलना था जब, तभी लब कुछ नहीं बोले बोलना था जब नहीं, बेब...

dwipadika: sanjiv

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द्विपदिका: अपनी बात संजीव  * Photo by  Taymaz Valley   पल दो पल का दर्द यहाँ है पल दो पल की खुशियाँ हैं आभासी जीवन जीते हम नक...

navgeet: - sanjiv

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नवगीत: बाँस बना ताज़ा अखबार संजीव,  Photo by  seanmcgrath   अलस्सुबह बाँस बना ताज़ा अखबार, फाँसी लगा किसान ने ख़बर बनाई खूब, ...

navgeet: apanon par -sanjiv,

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नवगीत: अपनों पर संजीव  Photo by  tonymitra   अपनों पर अपनों की तिरछी रहीं निगाहें, साये से भय खाते लोग दूर न होता शक का रोग ब...

rashtreey muktak: -sanjiv

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मुक्तक: हम एक हों संजीव, राष्ट्रीय, भारत,   Photo by  kannanokannan   हम एक हों, हम नेक हों, बल दो हमें जगदंबिके नित प्रात हो ह...
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